भारत का ईंधन निर्यात अक्तूबर 2022 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोल, डीजल और अन्य परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू बाजार में बढ़ती मांग और कई रिफाइनरियों में चल रहे रखरखाव कार्य (मेंटेनेंस) इसके प्रमुख कारण हैं।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक, गर्मी और औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि के चलते देश के भीतर ईंधन की खपत बढ़ी है। ऐसे में तेल कंपनियों ने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए निर्यात में कटौती की है। इसके अलावा कुछ प्रमुख रिफाइनरियों में निर्धारित मरम्मत और तकनीकी उन्नयन कार्यों के कारण उत्पादन क्षमता भी प्रभावित हुई, जिससे निर्यात योग्य ईंधन की उपलब्धता कम हो गई।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में रिफाइनरियों के सामान्य संचालन में लौटने और वैश्विक बाजार की स्थिति में सुधार के बाद निर्यात में फिर बढ़ोतरी देखी जा सकती है। हालांकि फिलहाल घरेलू मांग को पूरा करना तेल कंपनियों की प्राथमिकता बना हुआ है, जिसके चलते निर्यात पर दबाव बना रहने की संभावना है।


