भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हालिया बयान को लेकर उठे विवाद पर सफाई दी है। उन्होंने मीडिया की रिपोर्टिंग पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। CJI ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी युवाओं के खिलाफ नहीं थी, बल्कि फर्जी डिग्री और गलत तरीके से योग्यता हासिल करने वालों की आलोचना के लिए थी।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि शिक्षा और योग्यता का सम्मान करना बेहद जरूरी है, लेकिन जब फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए सिस्टम को नुकसान पहुंचाया जाता है तो यह देश और युवाओं दोनों के भविष्य के लिए खतरनाक है। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य ईमानदारी और पारदर्शिता को बढ़ावा देना था, न कि मेहनत करने वाले युवाओं को निशाना बनाना।
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CJI सूर्यकांत ने मीडिया से अपील की कि संवेदनशील बयानों को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत न किया जाए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका हमेशा युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और पारदर्शी व्यवस्था के पक्ष में खड़ी रही है।






