वेस्ट एशिया में जारी तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात फिलहाल ठंडे पड़े हैं, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतें उबाल मार रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्र में अस्थिरता और सप्लाई बाधित होने की आशंका के कारण निवेशकों में चिंता बनी हुई है। ऊर्जा आपूर्ति पर जोखिम बढ़ने से तेल की मांग और कीमतों दोनों में तेजी देखी जा रही है, जिसका असर कई देशों की महंगाई पर पड़ सकता है।
read also: फिर महंगे होंगे खाने के तेल? 5-6% तक बढ़ सकती हैं कीमतें, रसोई बजट पर पड़ेगा सीधा असर
ऊर्जा बाजार के जानकार मानते हैं कि यदि तनाव लंबे समय तक बना रहा, तो ईंधन और परिवहन लागत बढ़ने से वैश्विक आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है। इससे आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना जताई जा रही है।





