मोहन भागवत ने संस्कृत भाषा को भारत की सांस्कृतिक पहचान बताते हुए इसे “राष्ट्र की आत्मा” कहा है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की परंपरा, ज्ञान और सभ्यता की आधारशिला है, जिसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख ने लोगों से संस्कृत सीखने की अपील करते हुए कहा कि यह भाषा भारतीय संस्कृति को समझने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए संस्कृत का अध्ययन बेहद महत्वपूर्ण है।
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उनके इस बयान के बाद भाषा और संस्कृति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। समर्थकों का मानना है कि संस्कृत को बढ़ावा देने से सांस्कृतिक विरासत मजबूत होगी, जबकि आलोचकों का कहना है कि भाषाई विविधता को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।


