घरेलू LPG सिलेंडर की डिलीवरी को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए ऑयल कंपनियों ने डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) सिस्टम लागू किया है। यह एक OTP जैसा कोड होता है, जो सिलेंडर डिलीवरी से ठीक पहले उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है। इसका मकसद फर्जी डिलीवरी रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि सिलेंडर सही ग्राहक तक ही पहुंचे। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई जगहों पर DAC न मिलने या समय पर न आने की वजह से डिलीवरी में परेशानी भी सामने आई है।
LPG कंपनियों के नियमों के अनुसार, डिलीवरी बॉय को सिलेंडर देने से पहले ग्राहक से DAC लेना अनिवार्य है। बिना DAC दिए सिलेंडर की डिलीवरी पूरी नहीं मानी जाती। इस सिस्टम से ब्लैक मार्केटिंग, फर्जी एंट्री और बिना डिलीवरी के बिलिंग जैसी समस्याओं पर रोक लगाने में मदद मिलती है।
डिलीवरी बॉय जब आपके घर सिलेंडर लेकर पहुंचे तभी उसे DAC बताना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति फोन या मैसेज पर पहले से कोड मांगता है, तो इसे साझा नहीं करना चाहिए। नियम साफ कहते हैं कि सिलेंडर आपके सामने आने के बाद ही DAC दें, ताकि डिलीवरी की पुष्टि उसी समय हो सके।
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अगर DAC गलत व्यक्ति को दे दिया गया तो सिलेंडर की फर्जी डिलीवरी दर्ज हो सकती है और बाद में शिकायत करना मुश्किल हो सकता है।इसलिए अगली बार LPG सिलेंडर लेते समय याद रखें—डिलीवरी बॉय के हाथ में सिलेंडर दिखे, तभी DAC साझा करें। इससे आपकी सब्सिडी, रिकॉर्ड और गैस कनेक्शन सुरक्षित रहेगा।


