एक नई रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि स्मार्टफोन यूजर्स का डेटा बेहद तेजी से शेयर हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक एंड्रॉयड डिवाइस हर 4.5 मिनट में Google को डेटा भेजते हैं, भले ही यूजर फोन का सक्रिय रूप से इस्तेमाल न कर रहा हो। इस डेटा में लोकेशन, ऐप यूसेज और डिवाइस से जुड़ी कई तकनीकी जानकारियां शामिल हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह डेटा कलेक्शन विज्ञापन, सेवाओं को बेहतर बनाने और यूजर अनुभव सुधारने के लिए किया जाता है, लेकिन इससे प्राइवेसी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। कई साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यूजर्स को अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स और ऐप परमिशन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
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रिपोर्ट सामने आने के बाद डिजिटल प्राइवेसी को लेकर चिंता बढ़ गई है और यूजर्स अब टेक कंपनियों से पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। आने वाले समय में डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी नियमों को लेकर सख्ती बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।


