पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। संयुक्त राष्ट्र की संस्था United Nations Development Programme (UNDP) की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि हालात बिगड़ने पर भारत में करीब 25 लाख लोग गरीबी रेखा के नीचे जा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, सप्लाई चेन में बाधा और वैश्विक बाजार में अनिश्चितता इसका मुख्य कारण बन सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया से भारत का ऊर्जा और व्यापारिक संबंध काफी मजबूत है, इसलिए किसी भी बड़े भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर घरेलू महंगाई और रोजगार पर पड़ सकता है। खासतौर पर ईंधन कीमतों में उछाल से परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत बढ़ने का खतरा है, जिससे निम्न और मध्यम वर्ग पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
UNDP ने सरकारों को सतर्क रहने और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करने की सलाह दी है, ताकि संभावित आर्थिक झटके से कमजोर वर्गों को बचाया जा सके। रिपोर्ट ने संकेत दिया है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले महीनों में आर्थिक असमानता और गरीबी का स्तर बढ़ सकता है।


