डिजिटल दौर में बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को लेकर Supreme Court of India के एक जस्टिस ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि तकनीक न्याय व्यवस्था के लिए सहायक हो सकती है, लेकिन न्यायिक फैसलों में मानवीय विवेक सबसे अहम है। जस्टिस ने चेतावनी दी कि एआई पर अत्यधिक निर्भरता न्याय की मूल भावना को प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने कहा कि अदालतों में डिजिटल टूल्स और एआई का उपयोग शोध और केस मैनेजमेंट जैसे कामों में उपयोगी है, लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा न्यायाधीश की समझ, संवेदनशीलता और अनुभव पर आधारित होना चाहिए। अगर एआई पर अंधविश्वास किया गया तो इससे न्यायिक प्रक्रिया में पक्षपात या गलत व्याख्या का खतरा बढ़ सकता है।
जस्टिस ने जोर देकर कहा कि तकनीक को सहायक के रूप में अपनाना चाहिए, न कि निर्णय लेने वाले के रूप में। न्यायपालिका का उद्देश्य निष्पक्ष और मानवीय न्याय देना है, इसलिए एआई के उपयोग के साथ मजबूत नैतिक और कानूनी दिशानिर्देश जरूरी हैं।


