सरकार ने स्पष्ट किया है कि बौद्ध धर्म अपनाने वाले लोगों को अनुसूचित जाति (SC) की सूची में ही शामिल रखा जाएगा। यह निर्णय सामाजिक न्याय और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप बताया जा रहा है। सरकार का कहना है कि धर्म परिवर्तन के बावजूद ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव और पिछड़ेपन की स्थिति खत्म नहीं होती, इसलिए उन्हें आरक्षण और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता रहेगा।
यह फैसला लंबे समय से चल रही बहस और विभिन्न संगठनों की मांगों के बाद सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे समाज के वंचित वर्गों को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के अवसर मिलते रहेंगे। सरकार ने दोहराया कि यह कदम सामाजिक समानता और समावेशी विकास के उद्देश्य को मजबूत करेगा।
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नीतिगत स्तर पर यह निर्णय India में सामाजिक न्याय की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों के अधिकारों और अवसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।


