बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की नदियों के संरक्षण को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि अब नदी संरक्षण केवल प्रशासनिक बैठकों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसके लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण जरूरी है। इसी के तहत सरकार की बनाई कमेटी में बदलाव करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों की जगह विषय विशेषज्ञों को शामिल करने को कहा गया है।
न्यायालय ने नदियों के प्राकृतिक प्रवाह, प्रदूषण नियंत्रण और पुनर्जीवन के लिए हाइड्रोलॉजी, पर्यावरण और भूगोल विशेषज्ञों की भूमिका को अहम बताया। राज्य सरकार ने कोर्ट को जानकारी दी कि उद्गम से लेकर अंतिम प्रवाह तक नदियों के संरक्षण की समग्र योजना तैयार की जा रही है। इसके तहत 15 दिनों में उद्गम स्थलों की पहचान, जियो-टैगिंग, गंदे पानी के ट्रीटमेंट और सूचना बोर्ड लगाने जैसे कदम उठाए जाएंगे।
इस योजना में अरपा, महानदी, शिवनाथ सहित कई प्रमुख नदियों को शामिल किया गया है, जिनके लिए वैज्ञानिक सर्वे और डीपीआर तैयार होगी।


