बस्तर। बस्तर संभाग में लंबे समय बाद माओवादी संगठन की ओर से जारी एक नए प्रेस नोट ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। माड़ डिवीजन कमेटी की सचिव रणिता के नाम से जारी इस प्रेस नोट में संगठन की सक्रियता और भविष्य की रणनीति को लेकर कई अहम दावे किए गए हैं।
प्रेस नोट में रणिता ने खुद को ‘जेनजी नक्सली’ बताते हुए कहा है कि माओवादी संगठन आत्मसमर्पण नहीं करेगा और उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। बयान में देशभर में हिंसक गतिविधियों को जारी रखने की बात भी कही गई है। इस प्रेस नोट के सामने आने के बाद बस्तर सहित पूरे क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, इससे पहले बस्तर में माओवादी नेता रूपेश के आत्मसमर्पण के बाद माड़ डिवीजन कमेटी को लगभग निष्क्रिय माना जा रहा था। सुरक्षा एजेंसियों को लग रहा था कि लगातार चल रहे अभियानों के कारण संगठन कमजोर पड़ चुका है। लेकिन अचानक सामने आए इस प्रेस नोट ने सुरक्षा एजेंसियों के आकलन और रणनीति पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब इस प्रेस नोट की सत्यता की जांच में जुट गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि प्रेस नोट वास्तव में माओवादी संगठन की ओर से जारी किया गया है या इसके पीछे कोई और रणनीति काम कर रही है। इसके लिए तकनीकी और खुफिया स्तर पर जांच की जा रही है और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
बस्तर क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों से सुरक्षा बलों द्वारा लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के दौरान कई बड़े माओवादी नेता मारे गए या उन्होंने आत्मसमर्पण किया है। इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियों का मानना था कि माओवादी संगठन की गतिविधियां काफी कमजोर हो चुकी हैं। हालांकि इस नए प्रेस नोट ने संकेत दिया है कि संगठन अभी भी सक्रिय रहने की कोशिश कर रहा है।
इधर केंद्र और राज्य सरकार भी नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के लिए लगातार अभियान चला रही हैं। भारत सरकार ने देश से नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे के लिए 31 मार्च 2026 की समय सीमा तय की है और अब इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए कुछ ही दिन शेष हैं।
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने हाल ही में कहा था कि सशस्त्र नक्सलवाद को खत्म करने की प्रक्रिया तय समय सीमा के अनुसार आगे बढ़ रही है। वहीं बस्तर दौरे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी दोहराया था कि सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई के कारण नक्सली बैकफुट पर आ गए हैं और सरकार नक्सलवाद के खात्मे के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस प्रेस नोट के हर पहलू की जांच कर रही हैं। यह भी देखा जा रहा है कि क्या माओवादी संगठन फिर से अपनी गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश कर रहा है या यह केवल मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति है। जांच के बाद ही इस प्रेस नोट की वास्तविकता सामने आ सकेगी।


