अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक Brent Crude Oil की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गई है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। तेल की कीमतों में यह बढ़ोतरी भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण हो रही है, जिसका असर दुनिया भर के वित्तीय बाजारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
तेल की कीमत बढ़ने के साथ ही कई देशों के शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। एशिया, यूरोप और अमेरिका के प्रमुख सूचकांक दबाव में नजर आए, क्योंकि निवेशक बढ़ती महंगाई और ऊर्जा लागत को लेकर सतर्क हो गए हैं। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से कंपनियों की लागत बढ़ने और आर्थिक वृद्धि की रफ्तार प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर वैश्विक मुद्रास्फीति और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजारों की दिशा काफी हद तक तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक हालात पर निर्भर करेगी।


