भोपाल। Madhya Pradesh की मोहन यादव सरकार ने प्रोबेशन अवधि में वेतन कटौती संबंधी मामले में हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया है। इस कदम से प्रदेश के करीब एक लाख सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले लगभग 400 करोड़ रुपये के एरियर भुगतान पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
दरअसल, जबलपुर हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 12 दिसंबर 2019 के उस शासनादेश को निरस्त कर दिया था, जिसमें प्रोबेशन अवधि के दौरान नए कर्मचारियों को पूर्ण वेतन के बजाय क्रमशः 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन देने का प्रावधान किया गया था। अदालत ने इसे भेदभावपूर्ण और अवैध ठहराते हुए प्रभावित कर्मचारियों को काटी गई राशि एरियर सहित लौटाने के निर्देश दिए थे।
यह आदेश तत्कालीन कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में जारी हुआ था। बाद में सत्ता परिवर्तन के पश्चात शिवराज सिंह चौहान ने सार्वजनिक रूप से इस व्यवस्था को समाप्त करने की बात कही थी, लेकिन नियम में संशोधन नहीं हो सका।
अब राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के निर्णय के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी शुरू कर दी है। यदि मामला लंबित रहता है, तो कर्मचारियों को एरियर भुगतान में और देरी हो सकती है। कर्मचारी संगठनों ने सरकार के इस रुख पर निराशा जताई है।


