सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। दशकों से भूमिगत रहकर गतिविधियां संचालित करने वाला एक कुख्यात ‘बहुरूपिया’ नक्सली आखिरकार सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़ गया। बताया जा रहा है कि आरोपी कई राज्यों में सक्रिय रहा और अपनी पहचान छिपाने के लिए लगातार वेश बदलता था। उस पर कई गंभीर वारदातों में शामिल होने का आरोप है और वह लंबे समय से वांछित सूची में था।
जांच में सामने आया है कि वह आधुनिक तकनीक से दूर रहकर संदेश भेजने के लिए पारंपरिक और गुप्त तरीकों का इस्तेमाल करता था। फोन या इंटरनेट का उपयोग करने के बजाय वह भरोसेमंद कुरियर चैन और कोडित पर्चियों के जरिए संगठन तक सूचनाएं पहुंचाता था, जिससे सुरक्षाबलों के लिए उसकी लोकेशन ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता था। यही वजह रही कि वह वर्षों तक पकड़ से बाहर रहा।
सुरक्षा एजेंसियां अब उससे पूछताछ कर संगठन के नेटवर्क, फंडिंग और भविष्य की रणनीतियों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी से नक्सली गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ेगा और इलाके में सुरक्षा बलों की पकड़ और मजबूत होगी।


