देश के केंद्रीय बैंक Reserve Bank of India (RBI) ने ब्रोकर फंडिंग को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाया है। नए निर्देशों के तहत अब ब्रोकर फंडिंग पर 100 फीसदी कोलैटरल (गिरवी) अनिवार्य कर दिया गया है। यानी यदि कोई ब्रोकर ग्राहकों को ट्रेडिंग के लिए फंड उपलब्ध कराता है, तो उसे पूरी राशि के बराबर सुरक्षा कवच रखना होगा। इस कदम का उद्देश्य बाजार में अत्यधिक लीवरेज और जोखिम को नियंत्रित करना बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से शेयर बाजार में सट्टेबाजी और जोखिम भरे सौदों पर लगाम लग सकती है। पहले आंशिक कोलैटरल के जरिए अधिक फंडिंग संभव थी, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ने का खतरा रहता था। अब 100% कोलैटरल की शर्त लागू होने से ब्रोकरों की पूंजी लागत बढ़ सकती है और मार्जिन ट्रेडिंग की गति कुछ हद तक धीमी पड़ सकती है।
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हालांकि, दीर्घकाल में यह कदम बाजार की पारदर्शिता और स्थिरता को मजबूत कर सकता है। निवेशकों के लिए यह संदेश है कि जोखिम प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाए। आरबीआई का यह निर्णय वित्तीय प्रणाली को अधिक सुरक्षित और अनुशासित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।


