Afghanistan में लागू किए गए नए कानून को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नए प्रावधानों में पत्नी को पीटने जैसे घरेलू हिंसा के मामलों में अधिकतम 15 दिन की सजा का प्रावधान है, जबकि जानवरों की लड़ाई आयोजित करने पर पांच महीने तक की जेल हो सकती है। सजा के इस अंतर को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
इस मुद्दे पर United Nations (UN) ने भी चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि कानून में सजा का यह अनुपात महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों को कमजोर कर सकता है। उनका तर्क है कि घरेलू हिंसा जैसे गंभीर अपराध के लिए इतनी कम सजा न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति को लेकर पहले से मौजूद चिंताओं को और बढ़ा सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने काबुल प्रशासन से अपील की है कि वह मानवाधिकारों और लैंगिक समानता के वैश्विक मानकों के अनुरूप कानूनों की समीक्षा करे। फिलहाल यह मुद्दा वैश्विक मंचों पर बहस का विषय बना हुआ है।


