अमेरिका में 800 डॉलर तक की बिना शुल्क (ड्यूटी-फ्री) आयात सुविधा समाप्त होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर दिखने लगा है। नए टैरिफ एक्ट के तहत अब इस सीमा तक आने वाले सामान पर भी शुल्क लगाया जा सकता है, जिससे खासकर छोटे और मध्यम निर्यातकों की लागत बढ़ने की आशंका है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब वैश्विक व्यापार पहले से ही अनिश्चितताओं से जूझ रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन छोटे निर्यातकों पर पड़ेगा, जो ई-कॉमर्स और सीमित ऑर्डर के जरिए अमेरिकी बाजार में अपनी मौजूदगी बनाए हुए थे। अतिरिक्त शुल्क और कस्टम प्रक्रिया से न सिर्फ उनकी कीमत प्रतिस्पर्धा घटेगी, बल्कि डिलीवरी समय और मुनाफे पर भी दबाव बढ़ेगा। भारत समेत कई विकासशील देशों के निर्यातकों के लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति मानी जा रही है।
व्यापार जानकारों का कहना है कि अब छोटे निर्यातकों को वैकल्पिक बाजारों की तलाश, लागत नियंत्रण और मूल्य रणनीति पर दोबारा काम करना होगा। साथ ही, सरकारों से भी निर्यातकों को राहत और समर्थन की मांग तेज हो सकती है, ताकि बदले हुए टैरिफ नियमों के बीच उनका कारोबार टिकाऊ बना रहे।


