Economic Survey 2026 में सरकार ने महंगाई और रुपये की स्थिति पर विस्तार से जानकारी दी है। सर्वे के मुताबिक बीते वर्ष वैश्विक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति शृंखला से जुड़े दबावों के कारण महंगाई पर असर पड़ा, हालांकि घरेलू स्तर पर नीतिगत कदमों से इसे काफी हद तक नियंत्रित रखने की कोशिश की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य और ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव महंगाई के प्रमुख कारक रहे।
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वहीं रुपये की कमजोरी को लेकर सर्वे में बताया गया है कि डॉलर की मजबूती और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा। इसके बावजूद रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है और विदेशी मुद्रा भंडार, निर्यात में सुधार व संरचनात्मक सुधारों से आने वाले समय में रुपये को सहारा मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि संतुलित मौद्रिक नीति और विकास पर फोकस से अर्थव्यवस्था स्थिर गति से आगे बढ़ेगी।


