एक नई रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स संग्रह के मामले में भारत ने बीते कुछ वर्षों में उल्लेखनीय सुधार किया है, लेकिन अब भी वह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में पीछे है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत का टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात विकसित देशों की अपेक्षा कम है, हालांकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भारत की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। जीएसटी और प्रत्यक्ष कर सुधारों का इसमें अहम योगदान माना गया है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों की तुलना में भारत में कर आधार अभी सीमित है। बड़ी आबादी होने के बावजूद टैक्स दायरे में आने वाले लोगों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनौपचारिक अर्थव्यवस्था, आय असमानता और कर जागरूकता की कमी इसके प्रमुख कारण हैं।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डिजिटल भुगतान, आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की बढ़ती संख्या और कर प्रशासन में पारदर्शिता से भारत की स्थिति तेजी से सुधर रही है। आने वाले वर्षों में यदि सुधारों की यही गति बनी रही, तो भारत टैक्स संग्रह के मामले में दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के और करीब पहुंच सकता है।


