छत्तीसगढ़ सरकार की चरणपादुका योजना ने वनांचल क्षेत्रों में खुशी की लहर दौड़ा दी है। इस योजना के तहत राज्य के 12.40 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को सीधा लाभ मिला है। तेंदूपत्ता संग्रह के दौरान पैरों की सुरक्षा के लिए चरणपादुकाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे ग्रामीण और वनवासी श्रमिकों को काम के दौरान सहूलियत मिल रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चरणपादुका योजना का उद्देश्य तेंदूपत्ता संग्राहकों की कार्य परिस्थितियों में सुधार करना और उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। वर्षों से जंगलों में नंगे पांव काम करने को मजबूर संग्राहकों के लिए यह योजना बड़ी राहत साबित हो रही है। इससे न केवल काम करना आसान हुआ है, बल्कि चोट और संक्रमण के जोखिम में भी कमी आई है।
वन क्षेत्रों से जुड़े लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि चरणपादुका योजना जैसे प्रयास वनवासियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। सरकार का दावा है कि आने वाले समय में ऐसी और योजनाओं के जरिए वनांचल के विकास और कल्याण को प्राथमिकता दी जाएगी।



