अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयान से राजनीतिक माहौल में हलचल पैदा कर दी है। ताज़ा संबोधन के दौरान ट्रंप ने कहा कि वे अमेरिका में रह रहे सोमालिया के प्रवासियों को पसंद नहीं करते और उन्होंने उनसे अपने देश लौटने का आग्रह किया। उनके इस बयान ने न केवल प्रवासी समुदाय में नाराज़गी बढ़ाई है, बल्कि मानवाधिकार समूहों और विपक्षी नेताओं ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
ट्रंप ने आरोप लगाया कि सोमालिया से आए प्रवासी अमेरिकी कानूनों का पालन नहीं करते और देश की सामाजिक व्यवस्था पर बोझ बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका उन लोगों के लिए है जो अमेरिकी मूल्यों का सम्मान करते हैं और देश की सुरक्षा के साथ समझौता नहीं करते।
बयान सामने आने के बाद प्रवासी अधिकार संगठनों ने इसे भेदभावपूर्ण और नस्लीय टिप्पणी करार दिया है। उनका कहना है कि सोमालियाई समुदाय वर्षों से अमेरिका में मेहनत से काम कर रहा है और अर्थव्यवस्था व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
डेमोक्रेटिक नेताओं ने भी ट्रंप की टिप्पणी को “घृणा फैलाने वाला बयान” बताया और कहा कि यह अमेरिकी लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। वहीं, ट्रंप समर्थकों का कहना है कि उन्होंने केवल देश की सुरक्षा और सांस्कृतिक संतुलन की चिंता व्यक्त की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए ट्रंप की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है, क्योंकि प्रवासन मुद्दा हमेशा से उनके भाषणों का केंद्र रहा है।


