बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण में राजनीतिक तापमान अपने चरम पर है। इस बार मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा दिलचस्प हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस चरण में तेजस्वी यादव के सामने “17” का चक्रव्यूह खड़ा हो गया है, जो उनके लिए चुनौती बन सकता है। वहीं नीतीश कुमार भी इस बार निश्चिंत नहीं रह सकते क्योंकि कई सीटों पर जेडीयू को कड़ी टक्कर मिलने की संभावना जताई जा रही है।
दरअसल, दूसरे चरण में कुल 94 सीटों पर मतदान होना है, जिनमें से 17 सीटें ऐसी हैं जो महागठबंधन और एनडीए दोनों के लिए निर्णायक साबित होंगी। पिछली बार 2020 के चुनाव में इन 17 सीटों पर तेजस्वी यादव की पार्टी आरजेडी को मिली जीत ने विपक्ष को मजबूती दी थी। लेकिन इस बार समीकरण बदल चुके हैं। एनडीए की ओर से भाजपा और जेडीयू मिलकर इन सीटों पर पूरा फोकस कर रहे हैं।
तेजस्वी यादव ने युवाओं, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच बड़ी रैलियां की हैं, लेकिन अंदरखाने राजनीतिक पंडित मानते हैं कि ‘17 सीटों का खेल’ उनकी राह मुश्किल कर सकता है। इनमें से कई सीटें सीमांचल और मिथिलांचल क्षेत्रों में आती हैं, जहां पर क्षेत्रीय पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी वोटों के बिखराव का कारण बन सकती है।
वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए भी यह चरण कम चुनौतीपूर्ण नहीं है। उनके सामने सत्ता-विरोधी लहर के साथ-साथ पार्टी के अंदरूनी असंतोष की स्थिति भी है। कई पुराने नेता टिकट वितरण को लेकर असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। ऐसे में नीतीश कुमार को हर सीट पर रणनीतिक रूप से जुटना होगा।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस बार बिहार का चुनाव किसी एक लहर पर नहीं, बल्कि माइक्रो-मैनेजमेंट और जातीय समीकरणों पर टिका है। युवाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी, सोशल मीडिया प्रचार, और क्षेत्रीय नेताओं की लोकप्रियता इस बार जीत-हार का असली फैसला करेगी।
दूसरे चरण की वोटिंग से पहले सभी दलों ने प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पटना, गया, दरभंगा और भागलपुर जैसे जिलों में माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंग चुका है।


