भारत में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) एक बार फिर आम जनता की जेब पर असर डालने वाली है। आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में महंगाई दर कई सालों के उच्च स्तर पर पहुंच सकती है। खाद्य पदार्थों, ईंधन और परिवहन की बढ़ती कीमतों ने पहले से ही लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, और अब संकेत मिल रहे हैं कि स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
पिछले कुछ महीनों में सब्जियों, दालों, दूध, गैस सिलेंडर और पेट्रोल-डीजल के दामों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। खासकर टमाटर, प्याज और दालें जैसे रोजमर्रा की चीजें आम आदमी के बजट को बिगाड़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि असमय बारिश और सप्लाई चेन में बाधा के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे बाजार में कीमतें ऊपर जा रही हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगले तिमाही में खुदरा महंगाई दर 7% के पार जा सकती है, जो पिछले 3 सालों का सबसे ऊंचा स्तर होगा। इससे RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) पर भी दबाव बढ़ेगा कि वह ब्याज दरों में कोई कदम उठाए या नहीं।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर स्थिति पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले त्योहारी सीजन में खपत घट सकती है और बाजार की रफ्तार पर असर पड़ सकता है। वहीं, आम लोगों के लिए राशन, किराया, ट्रांसपोर्ट और मेडिकल खर्च संभालना मुश्किल हो जाएगा।
सरकार ने इस स्थिति को लेकर समीक्षा बैठकों की शुरुआत कर दी है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, महंगाई रोकने के लिए खाद्य भंडारण और आयात नीति में अस्थायी बदलाव किए जा सकते हैं।आर्थिक विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले समय में आम जनता को अपने खर्च पर कड़ी नजर रखनी होगी क्योंकि महंगाई की यह लहर कुछ समय तक जारी रह सकती है।
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