राजनांदगांव में खौफनाक वसूली कांड: फर्जी साइबर पुलिस बनकर युवक को फंसाने की धमकी, ₹5 लाख मांगने वाला गैंग बेनकाब
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में पुलिस की पहचान का दुरुपयोग कर एक युवक से मोटी रकम वसूलने की कोशिश का मामला सामने आया है। आरोपियों ने पहले युवक को बीयर पीने के बहाने बुलाया, फिर उसे सुनसान जगह ले जाकर कथित तौर पर फर्जी पुलिसकर्मी बनकर गांजा तस्करी के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी। इस पूरे घटनाक्रम में ₹5 लाख की मांग की गई। बसंतपुर पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि मुख्य आरोपी समेत तीन अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
यह मामला केवल जबरन वसूली का नहीं, बल्कि आम लोगों के भरोसे और कानून के नाम पर डर पैदा करने की कोशिश का भी है। पुलिस की वर्दी, पहचान या अधिकार का झूठा दावा करके किसी को अपराधी बताना गंभीर सवाल खड़े करता है।
दोस्ताना मुलाकात के बहाने रची गई साजिश
पुलिस के अनुसार, मामले की शुरुआत विक्की पवार के फोन से हुई। उसने युवक को बीयर लेकर भदौरिया चौक बुलाया। युवक के पहुंचने पर विक्की अपने साथी नवीन साहू के साथ काले रंग की फॉर्च्यूनर कार में वहां आया। इसके बाद युवक को कार में बैठाकर अमोरा तालाब से श्मशान घाट के पास स्थित एक सुनसान स्थान पर ले जाया गया।
वहां बीयर पीने के दौरान विक्की कुछ समय के लिए वहां से चला गया। इसी बीच मोटरसाइकिल पर सवार दो युवक पहुंचे। दोनों सादे कपड़ों में थे और उन्होंने खुद को साइबर पुलिस का कर्मचारी बताया।
आरोप है कि इन लोगों ने कार की तलाशी लेने का नाटक किया और दावा किया कि उसमें 20 किलो गांजा मिला है। इसी कथित बरामदगी को आधार बनाकर युवक को गांजा तस्करी के मामले में फंसाने की धमकी दी गई और ₹5 लाख की मांग की गई।
झूठे केस का डर दिखाकर वसूली की कोशिश
किसी व्यक्ति को गंभीर आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देना दबाव बनाने का प्रभावी तरीका हो सकता है। खासकर तब, जब सामने वाला व्यक्ति यह समझ न पाए कि कार्रवाई करने वाले लोग वास्तव में पुलिसकर्मी हैं या नहीं।
इस मामले में भी युवक ने डर के कारण अपने परिजनों को फोन किया और ढाई लाख रुपये की व्यवस्था करने को कहा। हालांकि, परिजनों के मौके पर पहुंचने के बाद युवक उनके साथ सीधे बसंतपुर थाने गया और पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी।
यहीं से कथित वसूली की योजना पर कार्रवाई का रास्ता खुला। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और तकनीकी जानकारी सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की।
एक आरोपी गिरफ्तार, मुख्य आरोपी समेत तीन फरार
बसंतपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नवीन साहू (27) को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान उसने विक्की पवार के कहने पर घटना में शामिल होने की बात स्वीकार की। पुलिस ने उसके पास से वारदात में इस्तेमाल मोबाइल फोन भी जब्त किया है।
गिरफ्तार आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं, मुख्य आरोपी विक्की पवार समेत तीन आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और किशोर न्याय अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और कथित साजिश में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट होना अब जांच के अहम हिस्से हैं।
फर्जी पुलिसकर्मियों से कैसे बचें?
इस घटना से आम नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक निकलता है। कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, साइबर सेल या किसी जांच एजेंसी का कर्मचारी बताता है, तो केवल उसके दावे के आधार पर उस पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
- पहचान की पुष्टि करें: संबंधित व्यक्ति का नाम, पद और पुलिस इकाई पूछें। जरूरत पड़ने पर संबंधित थाने से संपर्क करके पुष्टि करें।
- धमकी में आकर पैसे न दें: किसी कथित आपराधिक मामले को खत्म करने के नाम पर निजी तौर पर रकम मांगना गंभीर संदेह पैदा करता है।
- सुरक्षित स्थान पर जाएं: यदि कोई व्यक्ति जबरन सुनसान जगह ले जाए या दबाव बनाए, तो अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें और सुरक्षित अवसर मिलते ही पुलिस से संपर्क करें।
- साक्ष्य सुरक्षित रखें: फोन कॉल, संदेश, मोबाइल नंबर, वाहन का विवरण और अन्य उपलब्ध जानकारी जांच में मददगार हो सकती है।
- परिजनों को तुरंत बताएं: भय या बदनामी के डर से घटना छिपाने के बजाय भरोसेमंद व्यक्ति और पुलिस को जानकारी देना अधिक सुरक्षित है।
पुलिस की पहचान का दुरुपयोग रोकना क्यों जरूरी?
ऐसे मामलों में नुकसान केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, जिसे निशाना बनाया गया हो। जब कोई गिरोह कानून लागू करने वाली एजेंसी का झूठा रूप धारण करता है, तो इससे वास्तविक पुलिस व्यवस्था पर लोगों का भरोसा भी प्रभावित हो सकता है।
इसलिए जांच में केवल गिरफ्तार आरोपी तक सीमित रहने के बजाय कथित साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका, इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और संपर्कों तथा वारदात के तरीके की पड़ताल महत्वपूर्ण है। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि घटना व्यक्तिगत स्तर पर रची गई थी या इसके पीछे कोई व्यापक नेटवर्क था।



