बॉलीवुड अभिनेत्री यामी गौतम ने फिल्मों के बढ़ते ‘पेड प्रमोशन’ ट्रेंड की खुलकर आलोचना की है। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर चल रहे पेड कैंपेन, कृत्रिम चर्चा और फर्जी बज़ फिल्म निर्माण की वास्तविकता और दर्शकों की पसंद को भ्रमित करते हैं।
यामी गौतम ने कहा कि अब फिल्मों की गुणवत्ता से ज्यादा उनके प्रचार में लगाए गए रुपये सुर्खियां बटोरते हैं, जिससे ईमानदार काम करने वाले कलाकारों और छोटी फिल्मों को नुकसान होता है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार दर्शक यह नहीं जान पाते कि कौन-सी सामग्री असली प्रतिक्रिया है और कौन-सी पैसे देकर कराई गई पब्लिसिटी।
अभिनेत्री ने माना कि प्रमोशन फिल्म मार्केटिंग का हिस्सा है, लेकिन इसका अत्यधिक और कृत्रिम उपयोग योग्य नहीं है। उनके अनुसार, “अगर फिल्म अच्छी है तो दर्शकों तक अपनी जगह खुद बना लेगी। कृत्रिम प्रचार से सिर्फ शुरुआती उत्सुकता मिलती है, लेकिन लंबी दूरी फिल्म की कहानी और अभिनय ही तय करता है।”
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यामी गौतम के इस बयान ने मनोरंजन जगत में नई बहस छेड़ दी है, खासकर ऐसे समय में जब सोशल मीडिया पर पेड रिव्यू और मार्केटिंग इंफ्लुएंसर्स का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। अभिनेत्री की यह साफगोई उन कलाकारों की आवाज भी बनकर उभरी है जो गुणवत्ता को प्रचार से ऊपर रखते हैं।


