हर साल World TB Day पर टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जाती है, लेकिन इलाज और दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद यह बीमारी पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रही है। Tuberculosis आज भी भारत सहित कई देशों में एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, समय पर पहचान न होना, इलाज अधूरा छोड़ देना और जागरूकता की कमी इसके प्रमुख कारण हैं।
India में ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान के तहत सरकार कई प्रयास कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई बाधाएं सामने आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, पोषण की समस्या और सामाजिक कलंक के चलते मरीज समय पर इलाज नहीं करवा पाते। इसके अलावा, दवाओं के प्रति लापरवाही और ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी के बढ़ते मामलों ने भी चिंता बढ़ा दी है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी को खत्म करने के लिए केवल दवा ही नहीं, बल्कि बेहतर पोषण, जागरूकता और मजबूत हेल्थ सिस्टम की भी जरूरत है। सरकार, स्वास्थ्यकर्मियों और समाज के संयुक्त प्रयासों से ही ‘टीबी मुक्त भारत’ का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। आने वाले समय में इस दिशा में ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी होगा, ताकि इस बीमारी पर पूरी तरह काबू पाया जा सके।


