हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है और इस मौके पर मोबाइल, Wi-Fi और 5G नेटवर्क से कैंसर होने के दावों पर एक बार फिर बहस तेज हो जाती है। सोशल मीडिया पर अक्सर यह आशंका जताई जाती है कि रेडिएशन के कारण कैंसर का खतरा बढ़ रहा है। हालांकि वैज्ञानिक शोध और स्वास्थ्य संगठनों की रिपोर्ट्स इन दावों को पूरी तरह सही नहीं मानतीं।
विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल, Wi-Fi और 5G से निकलने वाली रेडियो फ्रीक्वेंसी रेडिएशन नॉन-आयोनाइजिंग होती है, जो डीएनए को नुकसान पहुंचाने में सक्षम नहीं मानी जाती। अब तक किए गए बड़े स्तर के अध्ययनों में यह साबित नहीं हो पाया है कि सामान्य उपयोग की स्थिति में ये तकनीकें कैंसर का सीधा कारण बनती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी मानता है कि तय सुरक्षा मानकों के भीतर इनका उपयोग सुरक्षित है।
read also: PM Kisan Yojana 22nd Installment: पैसे अटकने से बचें, जारी होने से पहले करें ये 2 जरूरी काम
हालांकि डॉक्टर सलाह देते हैं कि जरूरत से ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल से बचना और संतुलन बनाए रखना बेहतर है, क्योंकि इससे नींद, मानसिक स्वास्थ्य और आंखों पर असर पड़ सकता है। विश्व कैंसर दिवस 2026 पर विशेषज्ञों का यही संदेश है कि अफवाहों से बचें, वैज्ञानिक तथ्यों पर भरोसा करें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कैंसर के वास्तविक जोखिम कारकों पर ध्यान दें।


