काम का बढ़ता दबाव अब वैश्विक स्वास्थ्य संकट का रूप लेता जा रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार लंबे समय तक काम करने और अत्यधिक तनाव के कारण हर साल करीब 8.4 लाख लोगों की मौत हो रही है। यह खुलासा World Health Organization (WHO) और अंतरराष्ट्रीय श्रम से जुड़े अध्ययनों में सामने आया है, जिसने कार्यस्थल के तनाव को गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बताया है।
रिपोर्ट के मुताबिक लंबे समय तक काम करने से हृदय रोग, स्ट्रोक, मानसिक तनाव और नींद से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा, असंतुलित वर्क-लाइफ बैलेंस और डिजिटल कामकाज ने लोगों के आराम का समय कम कर दिया है, जिससे करोड़ों कर्मचारियों की सेहत प्रभावित हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाना अब बेहद जरूरी हो गया है। रिपोर्ट में कंपनियों और सरकारों से कार्य घंटे संतुलित करने, मानसिक स्वास्थ्य सहायता बढ़ाने और सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने की अपील की गई है, ताकि इस ‘खामोश खतरे’ को कम किया जा सके।


