महिला आरक्षण कानून को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार संसद के आगामी सत्र में दो नए विधेयक पेश कर सकती है, जिनका उद्देश्य महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करना बताया जा रहा है। इन विधेयकों के जरिए लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं।
वहीं विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर सभी दलों के बीच व्यापक सहमति बनाना जरूरी है, ताकि कानून लागू होने के बाद किसी तरह का विवाद न हो। कई नेताओं का मानना है कि बिना चर्चा के लाए गए विधेयक राजनीतिक टकराव को बढ़ा सकते हैं।
सरकार की ओर से संकेत मिले हैं कि महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। अगर ये विधेयक संसद में पेश होते हैं, तो देश की राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।


