अमेरिका में कॉफी, चाय और फलों (ट्रॉपिकल फ्रूट) पर लगाए गए टैरिफ में बदलाव की खबरें आ रही हैं, जिसके असर को लेकर भारत-निर्यातकों और अर्थव्यवस्था विशेषज्ञों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ हैं। यह एक जटिल परिदृश्य है — कहीं राहत है, तो कहीं चुनौतियाँ अभी भी बरकरार हैं।
ट्रम्प का फैसला: क्या बदला है?
हाल ही में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से कुछ प्रमुख आयातित वस्तुओं पर शुल्क में कमी की घोषणा की गई है। इनमें कॉफी, ट्रॉपिकल फल और अन्य जरूरी वस्तुएँ शामिल हैं।
ट्रम्प का उद्देश्य उपभोक्ता महंगाई (ग्रोसरी स्टोर की कीमतों) को कम करना बताया गया है।
भारत-निर्यातकों पर असर
हालाँकि इस कदम को “राहत” के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह भारत के लिए सीधा बहुत बड़ा फायदा नहीं हो सकता है:
उच्च टैरिफ का प्रॉब्लम:
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत से अमेरिका में कॉफी, चाय, मटे और मसालों के निर्यात पर पहले 0.2 % जैसा मामूली शुल्क था, लेकिन अब ट्रम्प की नीति के चलते इसे लगभग 26.4 % तक बढ़ा दिया गया है। इस वृद्धि के चलते, अनुमान है कि इन उत्पादों का भारतीय निर्यात लगभग 13.5% घट सकता है, जो करीब 62.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹ 500 करोड़) का नुक़सान है।
चाय उद्योग की चिंताएं:
भारतीय चाय एसोसिएशन (ITA) ने चेतावनी दी है कि 27 अगस्त से लगाया गया अतिरिक्त 25 % शुल्क (जो कुल मिलाकर 50% बन गया है) चाय निर्यात को प्रभावित कर सकता है। ITA यह दावा कर रही है कि चाय की उत्पादन लागत और अंतरराष्ट्रीय कम्पटीशन को देखते हुए, ये शुल्क निर्यातकों के लिए भारी पड़ सकते हैं।
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कॉफी व्यापार पर मिश्रित असर:
कुछ भारतीय कॉफी कंपनियों के लिए यह भी कहा गया है कि ट्रम्प के टैरिफ पॉलिसी से प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है। उदाहरण के लिए, Tata Consumer Products के सीईओ सनिल डी’सूज़ा ने कहा है कि नई टैरिफ नीतियों से उनकी कॉफी ब्रांडों को अमेरिका में फायदा हो सकता है।
लेकिन, यह फायदा बहुत बड़ा नहीं हो सकता क्योंकि भारत की अमेरिका में कॉफी निर्यात हिस्सेदारी सीमित है।


