पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब ऊर्जा क्षेत्र के बाद खाद (फर्टिलाइज़र) आपूर्ति पर भी दिखने लगा है, जिससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। West Asia में जारी भू-राजनीतिक हालात के चलते कच्चे माल और उर्वरकों की सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति लंबी चली, तो खेती की लागत बढ़ेगी और उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।
उर्वरकों की कमी से खासतौर पर विकासशील देशों पर अधिक दबाव पड़ सकता है, जहां कृषि उत्पादन पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। वैश्विक स्तर पर खाद की कीमतों में उछाल से किसानों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर अंततः आम उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई का खतरा भी बढ़ सकता है।
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विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि इस संकट का जल्द समाधान नहीं निकला, तो आने वाले समय में खाद्य आपूर्ति असंतुलित हो सकती है। सरकारें और अंतरराष्ट्रीय संगठन वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश में जुट गए हैं, ताकि खाद और खाद्य उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सके। यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।


