पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब विमानन क्षेत्र पर भी साफ दिखाई देने लगा है। क्षेत्र में सुरक्षा हालात बिगड़ने और कई हवाई मार्गों के प्रभावित होने के कारण एयरलाइंस कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ गई है। ऐसे में भारत की कई विमानन कंपनियों ने केंद्र सरकार से राहत पैकेज और नीतिगत समर्थन की मांग की है। विशेषज्ञों के मुताबिक संकट का असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन और ईंधन खर्च पर भी पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार West Asia के ऊपर से गुजरने वाले कई प्रमुख हवाई मार्गों में बदलाव करना पड़ रहा है, जिससे उड़ानों की दूरी और समय बढ़ गया है। इसका सीधा असर एयरलाइंस के ईंधन खर्च और टिकट कीमतों पर पड़ रहा है। विमानन कंपनियों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में परिचालन लागत काफी बढ़ गई है, जिससे उद्योग पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
विमानन क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने India सरकार से टैक्स में राहत, ईंधन पर शुल्क में कमी और अन्य नीतिगत समर्थन की मांग की है। उनका कहना है कि यदि संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर यात्रियों और विमानन उद्योग दोनों पर पड़ सकता है। ऐसे में उद्योग को स्थिर बनाए रखने के लिए सरकार की मदद अहम साबित हो सकती है।


