पश्चिम एशिया पर एक बार फिर जंग के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच आज ओमान में अहम वार्ता होनी है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। यह बातचीत परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर केंद्रित मानी जा रही है। कूटनीतिक हल निकलने की उम्मीद तो है, लेकिन बातचीत नाकाम होने की स्थिति में तनाव और भड़क सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वार्ता विफल रही तो इसका असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। इजरायल, सऊदी अरब, इराक, सीरिया और यमन जैसे देश भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। पहले से ही गाजा युद्ध और लाल सागर में बढ़ी गतिविधियों के चलते क्षेत्र बेहद संवेदनशील बना हुआ है, ऐसे में किसी भी तरह की चूक हालात को युद्ध की ओर धकेल सकती है।
ओमान वार्ता को पश्चिम एशिया में शांति की आखिरी बड़ी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। सफल बातचीत जहां तनाव कम कर सकती है, वहीं नाकामी की स्थिति में तेल की कीमतों से लेकर वैश्विक सुरक्षा तक पर गंभीर असर पड़ सकता है। अब देखना यह है कि कूटनीति कामयाब होती है या पश्चिम एशिया एक और बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता है।


