नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार, सूर्य देव हर महीने एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य देव वृश्चिक राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे वृश्चिक संक्रांति (Vrishchik Sankranti) कहा जाता है। यह दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। इस वर्ष वृश्चिक संक्रांति 16 नवंबर 2025, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
वृश्चिक संक्रांति 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त
संक्रांति तिथि: 16 नवंबर 2025 (रविवार)
संक्रांति का समय: प्रातः 01:17 बजे
पुण्य काल: सूर्योदय से लेकर दोपहर तक (लगभग 7:00 AM से 12:00 PM तक)
इस अवधि में स्नान, दान और सूर्य उपासना का विशेष महत्व बताया गया है।
वृश्चिक संक्रांति का महत्व
ज्योतिष के अनुसार, सूर्य देव जब वृश्चिक राशि में प्रवेश करते हैं, तो पितरों को तृप्त करने का यह शुभ समय होता है। इस दिन स्नान और तिल, गुड़, घी, वस्त्र तथा अनाज का दान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। मान्यता है कि इससे व्यक्ति के जीवन में नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
ऐसे करें सूर्य देव की पूजा
सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करें।
तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, अक्षत और लाल चंदन मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
“ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का 11 या 108 बार जाप करें।
इसके बाद सूर्य देव को लाल वस्त्र, गुड़ और गेहूं अर्पित करें।
जरूरतमंदों को वस्त्र, भोजन या दान दें। यह कर्म पितरों को प्रसन्न करता है।
इस दिन क्या करें और क्या न करें
करें:
सूर्य देव की पूजा और दान अवश्य करें।
तिल या गुड़ से बनी चीजें गरीबों को दान करें।
पवित्र नदियों या घर पर स्नान के बाद सूर्य को जल अर्पित करें।
न करें:
इस दिन किसी का अपमान या बुरा व्यवहार न करें।
मांस, मदिरा या तामसिक भोजन से परहेज करें।
झगड़ा या क्रोध से बचें।


