उत्तराखंड में बदरी-केदार QR कोड प्रकरण को लेकर अहम फैसला सामने आया है। संबंधित मामले में निर्णय देते हुए कहा गया है कि किसी भी सूचना को केवल न्यायालय का हवाला देकर सूचना का अधिकार (RTI) के तहत रोका नहीं जा सकता। फैसले में स्पष्ट किया गया कि आरटीआई कानून पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बना है और इसे मनमाने ढंग से सीमित नहीं किया जा सकता।
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आदेश में यह भी कहा गया कि यदि कोई मामला न्यायालय में लंबित है, तब भी सार्वजनिक हित से जुड़ी सूचनाएं देने से इनकार नहीं किया जा सकता, जब तक कि कानून में इसके लिए स्पष्ट प्रतिबंध न हो। इस फैसले को आरटीआई अधिकारों की मजबूती और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


