नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित 15% टैरिफ नीति को लेकर वैश्विक बाजार में हलचल है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से भारत को कुछ क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है। यदि अमेरिकी आयात पर समान दर से शुल्क लगाया जाता है, तो उन देशों के मुकाबले भारत को फायदा हो सकता है जिन पर पहले से अधिक टैरिफ लागू हैं। खासतौर पर टेक्सटाइल, ऑटो कंपोनेंट्स, केमिकल्स और कुछ इंजीनियरिंग उत्पादों में भारतीय निर्यातकों को अवसर मिल सकता है।
हालांकि सभी उत्पाद इस दायरे में नहीं आएंगे। जरूरी दवाओं, कुछ रणनीतिक टेक्नोलॉजी उत्पादों और विशेष व्यापार समझौतों के तहत आने वाली वस्तुओं को आंशिक या पूर्ण छूट मिल सकती है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर चीन जैसे देशों पर उच्च टैरिफ बरकरार रहता है और भारत पर तुलनात्मक रूप से कम प्रभाव पड़ता है, तो सप्लाई चेन का रुख भारत की ओर हो सकता है।
फिर भी जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होते। अमेरिका में मांग में गिरावट या वैश्विक व्यापार तनाव बढ़ने की स्थिति में भारतीय निर्यात प्रभावित हो सकता है। ऐसे में सरकार और उद्योग जगत के लिए जरूरी होगा कि वे निर्यात विविधीकरण, वैल्यू एडिशन और नए बाजारों की तलाश पर जोर दें। 15% टैरिफ का वास्तविक असर उत्पाद-विशेष, व्यापार समझौतों और वैश्विक आर्थिक हालात पर निर्भर करेगा।


