अमेरिका के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन बनाने के लिए एक मजबूत और स्थिर भारत बेहद आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने में भारत की भूमिका निर्णायक है। अधिकारी के अनुसार, अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करती है, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए भी अहम है।
अधिकारी ने यह भी कहा कि रक्षा, तकनीक, आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग लगातार गहरा हो रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि वॉशिंगटन भारत को एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में देखता है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन करता है। चीन की आक्रामक नीतियों के संदर्भ में भारत की सामरिक स्थिति को बेहद महत्वपूर्ण बताया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका-भारत संबंध नई ऊंचाइयों पर हैं। रक्षा समझौतों, क्वाड सहयोग और उभरती प्रौद्योगिकियों में साझेदारी से दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हुए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में भारत-अमेरिका रणनीतिक सहयोग एशिया की भू-राजनीति को नई दिशा दे सकता है।


