अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखने लगा है। राजधानी Delhi में व्यापारिक गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ने का अनुमान है, जहां करीब ₹5000 करोड़ के कारोबार पर संकट मंडरा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात के कारण सप्लाई चेन, आयात-निर्यात और परिवहन लागत पर सीधा असर पड़ा है, जिससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है।
दरअसल, युद्ध के चलते शिपिंग रूट्स और खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, जिससे माल ढुलाई महंगी और धीमी हो गई है। इसी कारण भारत के कई सेक्टर—खासकर दवाइयों और अन्य जरूरी सामान के निर्यात—पर हजारों करोड़ रुपये का खतरा बताया जा रहा है । बढ़ती लागत और देरी का सीधा असर व्यापारियों पर पड़ रहा है, जिससे बाजार में मांग और आपूर्ति दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
इस संकट का सबसे ज्यादा असर छोटे और मध्यम व्यापारियों पर पड़ रहा है, जिनकी कमाई पहले से ही सीमित होती है। बड़े कारोबारी जहां कुछ हद तक नुकसान सहन कर सकते हैं, वहीं छोटे दुकानदारों के लिए यह स्थिति गंभीर बनती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो दिल्ली समेत पूरे देश में महंगाई और व्यापारिक नुकसान और बढ़ सकता है, जिससे आम लोगों की जेब पर भी असर पड़ेगा।


