अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच आखिरकार अस्थायी संघर्ष विराम लागू हो गया है, लेकिन इस समझौते के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर जीत किसकी हुई। विशेषज्ञों और पूर्व राजनयिकों का मानना है कि इस युद्ध में किसी भी पक्ष को स्पष्ट जीत नहीं मिली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों ने अपने-अपने स्तर पर सफलता का दावा जरूर किया, लेकिन वास्तविकता यह है कि युद्ध का अंत किसी निर्णायक नतीजे के साथ नहीं हुआ।
जानकारों का कहना है कि युद्ध के दौरान भारी सैन्य नुकसान और क्षेत्रीय अस्थिरता देखने को मिली, जबकि नागरिकों को सबसे ज्यादा कीमत चुकानी पड़ी। कई विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका को लंबे समय का रणनीतिक लाभ नहीं मिला, वहीं ईरान भी भारी दबाव के बावजूद अपनी व्यवस्था बनाए रखने में सफल रहा। इसी वजह से इसे ऐसी स्थिति माना जा रहा है जहां दोनों पक्ष जीत का दावा कर सकते हैं, लेकिन किसी को भी वास्तविक बढ़त हासिल नहीं हुई।
पूर्व राजनयिकों का कहना है कि यह संघर्ष विराम केवल तनाव कम करने की दिशा में एक कदम है, स्थायी समाधान नहीं। अब दुनिया की नजर आगे होने वाली कूटनीतिक बातचीत पर टिकी है, जिससे मध्य पूर्व में स्थायी शांति की उम्मीद की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस युद्ध का सबसे बड़ा सबक यही है कि आधुनिक युद्धों में असली विजेता कोई नहीं होता, बल्कि नुकसान पूरे क्षेत्र और आम नागरिकों को उठाना पड़ता है।


