हिंद महासागर में चीन की गतिविधियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन के तीन जासूसी जहाज (Spy Ships) हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में देखे गए हैं, जिसके चलते भारत को अपना प्रस्तावित मिसाइल टेस्ट टालना पड़ा। यह घटना भारत की सुरक्षा एजेंसियों और नौसेना के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
सूत्रों का कहना है कि ये चीनी जहाज ऐसे हाई-टेक उपकरणों से लैस हैं, जो मिसाइल टेस्टिंग से जुड़ी तकनीकी जानकारियों और इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को ट्रैक कर सकते हैं। भारत किसी भी संवेदनशील जानकारी के लीक होने के खतरे को देखते हुए टेस्ट को पोस्टपोन करने के लिए मजबूर हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का उद्देश्य हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी बढ़ाना और भारत की सामरिक गतिविधियों पर नजर रखना है।ये जासूसी जहाज अक्सर उसी समय सक्रिय होते हैं जब भारत किसी लंबी दूरी की मिसाइल या रणनीतिक हथियार का परीक्षण करता है।चीन इन जहाजों की मदद से भारत की मिसाइल रेंज, पावर, कंट्रोल सिस्टम और रडार सिग्नेचर जैसी जानकारी जुटाने की कोशिश करता है।
भारतीय नौसेना ने भी क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है और इन जहाजों की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि चीन की यह बढ़ती सक्रियता हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं का हिस्सा है।भारत इन दिनों कई महत्वपूर्ण लॉन्ग-रेंज मिसाइल और डिफेंस सिस्टम टेस्ट करने की तैयारी कर रहा है।चीन की समुद्री घुसपैठ भारतीय सामरिक क्षमता की निगरानी का सीधा प्रयास माना जा रहा है।यह हिंद महासागर क्षेत्र में पावर बैलेंस को बदलने की ओर इशारा करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में हिंद महासागर में चीन की मौजूदगी और बढ़ सकती है। ऐसे में भारत को अपनी समुद्री सुरक्षा रणनीति और मजबूत करने की जरूरत होगी।


