Tenzin Yangki: एक पूर्व शिक्षाविद और सिविल सर्वेंट के रूप में अपना करियर शुरू करने वाली तेनजिन यांग्की अब बनी हैं अरुणाचल प्रदेश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी। यह न सिर्फ राज्य बल्कि पूरे उत्तर-पूर्व के लिए गर्व का क्षण है। तेनजिन यांग्की ने अपनी मेहनत, लगन और समर्पण से साबित किया कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। पहले उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों को दिशा दी और अब अपने नए रोल में कानून व्यवस्था और समाज की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रही हैं। उन्होंने न सिर्फ महिलाओं के लिए एक मिसाल कायम की है बल्कि यह भी बताया कि उम्र या पृष्ठभूमि कभी बाधा नहीं बन सकती अगर संकल्प मजबूत हो।
शिक्षा से शुरुआत, सेवा तक का सफर
तेनजिन यांग्की का सफर साधारण नहीं रहा। उनकी जड़ें अरुणाचल की पर्वतीय संस्कृति में गहराई से जुड़ी हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद शिक्षा क्षेत्र में कदम रखा और एक एकेडमिक प्रोफेशनल के रूप में कई युवाओं को शिक्षित किया। वह जानती थीं कि शिक्षा ही असली बदलाव की कुंजी है। लेकिन यहीं से उनके भीतर एक नया सपना आकार लेने लगा, सिर्फ ज्ञान नहीं, समाज की सुरक्षा और न्याय की जिम्मेदारी भी उठाना।
UPSC में सफलता और इतिहास रचने की उपलब्धि
तेनज़िन यांग्की ने अपनी नौकरी के साथ-साथ UPSC की तैयारी की। कठिन प्रतियोगिता, सीमित संसाधन और सामाजिक अपेक्षाओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में जगह बनाई। उनकी यह उपलब्धि अरुणाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी महिला का IPS बनना है, जो राज्य की महिलाओं के लिए गर्व और प्रेरणा दोनों है।
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तेनजिन यांग्की बनीं महिलाओं के लिए रोल मॉडल
तेनज़िन यांग्की न केवल सफलता की कहानी हैं, बल्कि उस सोच का प्रतीक हैं जो कहती है, “महिलाएं केवल घर की जिम्मेदार नहीं, समाज की भी संरक्षक बन सकती हैं।” उनकी कहानी ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों की उन बेटियों को संदेश देती है जो आज भी संसाधनों की कमी या परंपरागत सोच के कारण पीछे रह जाती हैं। वह बताती हैं कि चाहे आप किसी भी पृष्ठभूमि से हों, लगन, अनुशासन और आत्मविश्वास से हर मंज़िल हासिल की जा सकती है।
एक अधिकारी के रूप में तेनज़िन यांग्की का नजरिया सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है। वह महिलाओं की सुरक्षा, बच्चों की शिक्षा और युवाओं के सशक्तिकरण को लेकर भी बेहद सजग हैं। उनका मानना है कि “एक सशक्त समाज की नींव शिक्षित और सुरक्षित नागरिकों से ही रखी जाती है।”


