सुप्रीम कोर्ट ने महंगाई भत्ते (DA) को लेकर एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह कर्मचारियों का लागू करने योग्य अधिकार है। यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल सरकार से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सामने आई। अदालत ने स्पष्ट किया कि महंगाई भत्ता केवल नीतिगत निर्णय नहीं, बल्कि कर्मचारियों के वेतन से जुड़ा वैधानिक अधिकार है, जिसे उचित तरीके से लागू किया जाना चाहिए।
शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य सरकारें लंबे समय तक डीए के भुगतान को टाल नहीं सकतीं, खासकर तब जब कर्मचारी लगातार बढ़ती महंगाई का सामना कर रहे हों। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि डीए का उद्देश्य कर्मचारियों की क्रय शक्ति को बनाए रखना है, ऐसे में इसमें अनावश्यक देरी न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती।
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यह मामला पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों को केंद्र के समान डीए न दिए जाने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को राज्य कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। अब इस फैसले के बाद अन्य राज्यों में भी डीए से जुड़े मामलों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।


