सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में हाईवे किनारे बने अवैध ढाबों और उनके बाहर खड़ी गाड़ियों पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि इन ढाबों के कारण न केवल ट्रैफिक जाम बढ़ रहा है, बल्कि ये सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण भी बन चुके हैं। न्यायालय ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र-शासित प्रदेशों को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा — “हाईवे पर अवैध ढाबे और ट्रक पार्किंग स्थलों की मनमानी व्यवस्था सड़क सुरक्षा के लिए खतरा है। जब सरकारें इन पर ध्यान नहीं देतीं, तो आम जनता की जान खतरे में पड़ती है।” न्यायालय ने राज्यों से यह भी पूछा कि आखिर इतने वर्षों से सड़क किनारे चल रहे अनधिकृत भोजनालयों और ढाबों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। कोर्ट ने कहा कि सड़क सुरक्षा पर सरकारों की लापरवाही को अब “साधारण गलती नहीं, बल्कि अपराध” माना जाना चाहिए।
हादसों की वजह: सड़क पर अवैध पार्किंग
नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं में से लगभग 22% हादसे हाईवे किनारे खड़ी गाड़ियों से टकराने के कारण हुए हैं। ढाबों के बाहर ट्रक और कारें पार्क होने से दृश्यता घट जाती है, जिससे रात के समय आने वाले वाहनों को समय पर खतरा दिखाई नहीं देता।
एक अधिकारी ने कहा — “कई ढाबे बिना किसी अनुमति के बने हैं। वे ट्रकों को अपनी दुकान के बाहर पार्क करने देते हैं ताकि उन्हें ग्राहक मिलें, लेकिन इससे सड़क पर खतरनाक स्थिति बनती है।”
कोर्ट के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को निम्नलिखित कदम तुरंत उठाने के निर्देश दिए —
- सभी अवैध ढाबों की पहचान और सूची तैयार की जाए।
- हाईवे किनारे वाहन पार्किंग पर सख्त निगरानी की जाए।
- हर 20-25 किलोमीटर पर वैध ट्रक पार्किंग ज़ोन बनाए जाएं।
- NHAI और राज्य परिवहन विभाग संयुक्त मॉनिटरिंग टीम बनाएं।
साथ ही कोर्ट ने कहा कि अगर कोई राज्य या अधिकारी इस दिशा में लापरवाही दिखाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
जनहित में बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट का यह रुख देशभर में सड़क सुरक्षा के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस आदेश से ट्रक ड्राइवरों और यात्रियों दोनों की सुरक्षा में सुधार आएगा।एक सामाजिक संगठन “सेफ रोड इंडिया” की प्रवक्ता ने कहा — “यह आदेश जनता के हित में है। अब राज्य सरकारों पर दबाव बढ़ेगा कि वे ढाबों और पार्किंग व्यवस्था को नियंत्रित करें।”


