Supreme Court of India ने एक अहम मामले में सख्त रुख अपनाते हुए उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें आरोप लगाया गया था कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश को “बचाने” के लिए एक करोड़ रुपये की फीस मांगी गई थी। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस तरह के आरोपों के समर्थन में पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए गए, इसलिए याचिका को आगे सुनवाई के योग्य नहीं माना जा सकता।
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता से आरोपों से जुड़े प्रमाण और दस्तावेज पेश करने को कहा था। हालांकि, अदालत के अनुसार प्रस्तुत सामग्री आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। इसके चलते कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि न्यायपालिका से जुड़े गंभीर आरोप बिना ठोस आधार के नहीं लगाए जाने चाहिए।
अदालत ने यह भी कहा कि न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है और ऐसे मामलों में जिम्मेदारी के साथ याचिका दायर की जानी चाहिए। इस फैसले को न्यायिक संस्थाओं की साख और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


