नई दिल्ली। Supreme Court of India ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश और कथित भेदभाव से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में नौ जजों की संवैधानिक पीठ गठित की है। यह मामला लंबे समय से धार्मिक स्वतंत्रता और लैंगिक समानता के बीच संतुलन को लेकर देशभर में चर्चा का विषय रहा है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस संवेदनशील और व्यापक संवैधानिक प्रश्न पर विस्तृत सुनवाई 7 अप्रैल से शुरू की जाएगी।
यह विवाद मुख्य रूप से Sabarimala Temple में 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं के प्रवेश पर लगी परंपरागत पाबंदी को लेकर है। इससे पहले 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देते हुए इसे समानता के अधिकार से जोड़ा था, जिसके बाद देशभर में व्यापक बहस और विरोध-प्रदर्शन हुए थे। बाद में इस फैसले पर पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गईं, जिन पर अब विस्तृत संवैधानिक व्याख्या की आवश्यकता जताई गई है।
नौ जजों की पीठ इस बात पर विचार करेगी कि धार्मिक प्रथाओं की संवैधानिक मान्यता, ‘आवश्यक धार्मिक प्रथा’ की परिभाषा और महिलाओं के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए। इस सुनवाई को न केवल सबरीमाला बल्कि देश के अन्य धार्मिक स्थलों में महिलाओं की भागीदारी से जुड़े मामलों के लिए भी अहम माना जा रहा है।


