मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी देशों ने साफ कर दिया है कि अगर Strait of Hormuz अस्थायी रूप से बंद भी हो जाता है, तब भी वैश्विक तेल और गैस सप्लाई पर बड़ा असर नहीं पड़ने दिया जाएगा। क्षेत्र के प्रमुख उत्पादक देश वैकल्पिक पाइपलाइन, नए समुद्री रूट और भंडारण क्षमता बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई देशों ने अपने निर्यात ढांचे को इस तरह तैयार करना शुरू कर दिया है कि कच्चा तेल सीधे लाल सागर या अरब सागर के बंदरगाहों तक पहुंच सके।
खास तौर पर Saudi Arabia, United Arab Emirates और Qatar पाइपलाइन नेटवर्क और LNG टर्मिनलों का विस्तार कर रहे हैं। इन योजनाओं के तहत तेल को खाड़ी से बाहर निकालने के लिए नए लैंड-रूट तैयार किए जा रहे हैं, ताकि होर्मुज पर निर्भरता कम हो सके। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति वैश्विक बाजार में कीमतों की अस्थिरता को कम करने में मदद करेगी और सप्लाई चेन को ज्यादा सुरक्षित बनाएगी।
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इस पूरी रणनीति का सबसे बड़ा फायदा India को मिल सकता है, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी से आयात करता है। वैकल्पिक सप्लाई रूट बनने से भारत को स्थिर कीमतों पर लगातार तेल-गैस मिलती रहेगी और शिपिंग जोखिम भी घटेंगे। इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और महंगाई पर भी काबू रखने में मदद मिल सकती है।


