Success की कोई उम्र नहीं होती। कोई कम उम्र में अपनी पहचान बना लेता है तो कोई रिटायरमेंट के बाद। लेकिन मायरा नीरज शर्मा (Mayara Neeraj Sharma) ने केवल 19 साल की उम्र में वह कर दिखाया जो कई लोग पूरी जिंदगी मेहनत करने के बाद भी नहीं कर पाते। आज वह Multifit Gym Chain की डायरेक्टर हैं और उनका कारोबार भारत ही नहीं बल्कि विदेशों तक फैला हुआ है।
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बिज़नेस बैकग्राउंड से आईं, लेकिन रास्ता आसान नहीं था
मायरा एक बिज़नेस परिवार से आती हैं। उनके माता-पिता और बहनें Lexicon Group से जुड़े हैं, जिसके अंतर्गत Lexicon International School, प्रेस्कूल चेन, मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, बेबी केयर ब्रांड Citta और कई अन्य कारोबार शामिल हैं।
हालाँकि मायरा की सफलता का रास्ता आसान नहीं था। साल 2015 में Samir Kapoor ने यूके से मल्टीफिट की शुरुआत की थी। लेकिन जब कंपनी वित्तीय संकट में फंस गई, तब इसे खरीदने का प्रस्ताव लेक्सिकन ग्रुप के पास आया।
कोविड के दौरान खरीदा डूबता ब्रांड
कोविड महामारी के समय, मायरा के माता-पिता नीरज शर्मा और दीप्ति शर्मा ने मल्टीफिट को खरीदने का बड़ा फैसला लिया। उस समय यह कंपनी भारी कर्ज में डूबी हुई थी। परिवार ने इस ब्रांड में लगभग 25 करोड़ रुपये का निवेश किया।
लेकिन असली बदलाव मायरा की मेहनत से आया। उन्होंने बिज़नेस मॉडल को नया रूप दिया और चार साल के भीतर ही पूरे निवेश की भरपाई कर दी।
चुनौतियाँ थीं बड़ी
मायरा बताती हैं कि कोविड के बाद लोगों को दोबारा जिम में लाना सबसे बड़ी चुनौती थी। लोग सार्वजनिक स्थानों पर जाने से डर रहे थे। इसके अलावा कंपनी के पुराने लोन चुकाना और कर्मचारियों को नए मैनेजमेंट के अनुसार ढालना भी बेहद कठिन रहा।
उनका मानना है कि मल्टीफिट सिर्फ एक “सेटअप-ओरिएंटेड बिज़नेस” नहीं, बल्कि एक “गोल-ओरिएंटेड बिज़नेस” है। इसी सोच ने कंपनी को आगे बढ़ाया।
आज MULTIFIT है इंटरनेशनल ब्रांड
आज Multifit Wellness Pvt. Ltd. के दुनियाभर में 30 से ज्यादा सेंटर हैं। इनमें से एक यूके और एक यूएई में है, जबकि बाकी भारत के कई शहरों में फैले हैं। मुंबई और पुणे में इनके दो प्रमुख सेंटर मौजूद हैं।
कुछ सेंटर कंपनी के अपने हैं, जबकि बाकी फ्रेंचाइज़ी मॉडल पर चलते हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में कंपनी का टर्नओवर 26 करोड़ रुपये तक पहुँच गया, और यह लगातार बढ़ रहा है।
सफलता से मिला सबक
मायरा नीरज शर्मा की कहानी यह साबित करती है कि सफलता पाने के लिए उम्र कोई बाधा नहीं है। अगर मेहनत और सही रणनीति हो तो किसी भी डूबती कंपनी को फिर से खड़ा किया जा सकता है।
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