केंद्र सरकार ने केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए केंद्र ने राज्यों को लगभग 25 लाख करोड़ रुपये देने पर सहमति जताई है। इस कदम को संघीय ढांचे को मजबूत करने और राज्यों की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, बढ़ी हुई हिस्सेदारी से राज्यों को विकास कार्यों, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक योजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन मिलेंगे। इससे राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता बढ़ेगी और वे अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू कर सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्रीय असंतुलन कम करने में भी मदद मिलेगी।
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केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप है। राज्यों को मिलने वाली अतिरिक्त राशि से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने, निवेश बढ़ने और रोजगार सृजन को बल मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में इस निर्णय का असर राज्यों की विकास गति पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।


