भारतीय रुपये में लगातार गिरावट को लेकर केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह केवल भारत की समस्या नहीं है, बल्कि दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाएं इस तरह की चुनौतियों का सामना कर रही हैं।
पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार रुपये को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है। निर्यात बढ़ाने, विदेशी निवेश आकर्षित करने और घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ‘मेक इन इंडिया’ और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) जैसी योजनाएं देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में मदद करेंगी, जिससे भविष्य में रुपये की स्थिति बेहतर हो सकती है।
मंत्री ने भरोसा जताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत आधार पर आगे बढ़ रही है और आने वाले समय में इसका सकारात्मक असर मुद्रा बाजार पर भी दिखाई देगा। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में स्थिरता आने और आयात-निर्यात संतुलन बेहतर होने पर रुपये में मजबूती लौट सकती है।


