भारतीय मुद्रा में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 95 के पार पहुंच गया है। विदेशी निवेश में कमी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को इस गिरावट की मुख्य वजह माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और वैश्विक तनावों का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा है।
Reserve Bank of India हालात पर नजर बनाए हुए है और बाजार में अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए कदम उठा सकता है। वहीं आयात पर निर्भर क्षेत्रों—खासकर तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स—पर इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक United States में मजबूत आर्थिक संकेत और ऊंची ब्याज दरें डॉलर को लगातार मजबूत बना रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में रुपये की चाल काफी हद तक वैश्विक बाजार, तेल कीमतों और विदेशी निवेश के रुख पर निर्भर करेगी।


